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हरियाणा में मुख्यमंत्री ने खोला प्रदेशवासियों के लिए सौगातों का पिटारा, जानिये क्या-क्या की घोषणाएं ?

Yuva Haryana, Chandigarh हरियाणा सरकार ने आज प्रदेशवासियों के लिए अलग अलग कई बड़ी घोषणाएं की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डिजीटल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घोषणाओं की जानकारी दी। सीएम ने कहा कि किसानों, आम लोगों और गरीबों के लिए अनेकों योजनाएं लागू की गई है। कृषि से जुड़ी...


हरियाणा में मुख्यमंत्री ने खोला प्रदेशवासियों के लिए सौगातों का पिटारा, जानिये क्या-क्या की घोषणाएं ?

Yuva Haryana, Chandigarh

हरियाणा सरकार ने आज प्रदेशवासियों के लिए अलग अलग कई बड़ी घोषणाएं की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने डिजीटल प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस घोषणाओं की जानकारी दी। सीएम ने कहा कि किसानों, आम लोगों और गरीबों के लिए अनेकों योजनाएं लागू की गई है।

कृषि से जुड़ी हुई सिंचाई विभाग की योजना- हरियाणा में किसानों के लिए सरकार ने खेतों में कच्चे और पुराने पक्के रजवाहों को पक्का करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में पिछले हफ्ते ही माइक्रो इरिगेशन विभाग ने यह योजना तैयार की है।

हरियाणा में मुख्यमंत्री ने खोला प्रदेशवासियों के लिए सौगातों का पिटारा, जानिये क्या-क्या की घोषणाएं ?

उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 15006 कच्चे और पक्के रजवाहे हैं, जो कि नहरों से निकलते हैं। उन्होने जानकारी देते हुए बताया कि इनमें करीब 3 हजार कच्चे रजवाहे हैं जबकि 12 हजार के करीब पक्के रजवाहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जो कच्चे रजवाहे हैं उनको पक्का किया जाएगा और जो 20 साल पुराने पक्के रजवाहे हैं उनको भी पक्का किया जाएगा।

सीएम ने बताया कि इस योजना से तीन योजनाओे जैसे भाखड़ा कैनाल कमांड फेस टू, WJC कनाल फेस टू और JNN कैनाल कमांड फेस 2, इनके 1546 रजवाहों को क्का किया जाएगा। इसमें पांच लाख एकड़ से ज्यादा जमीनों की सिंचाई होगी। इससे लाखों किसानों को फायदा होगा।

उन्होंने बताया कि माइक्रो इरिगेशन को जो लेंगे उनको प्राथमिकता के आधार पर 70 फीसदी बिजली ट्यूबेल कन्केशन, चाहे सिंचाई की योजना होगी, उनको माइक्रो इरिगेशन की योजना लगाएंगे तो उनको प्राथमिकता मिलेगी। वहीं इस योजना पर 3700 करोड़ रुपये की राशि खर्च होगी और 2025 तक इसे पूरा कर लिया जाएगा।

हरियाणा में मुख्यमंत्री ने खोला प्रदेशवासियों के लिए सौगातों का पिटारा, जानिये क्या-क्या की घोषणाएं ?

ग्रामीण इलाकों में कच्ची सड़कों को पक्का करना- मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने ग्रामीण इलाकों की कच्चे रास्तों को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के ग्रामीण इलाकों के जो पांच करम के कच्चे रास्ते एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ते हैं उनको पक्का किया जाएगा।  प्रदेश के 475 से ज्यादा कच्चे रास्तों को पक्का किया जाएगा। जिनकी लंबाई 1225 किलोमीटर है। 490 करोड़ की राशि खर्च होगी, इसे नाबार्ड के जरिये ही होगी।

दुकानों और मकानों के लिए योजना- हरियाणा सरकार ने नगर निकायों की बंद परिसंपत्तियों के विमुद्रीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए नगर निकायों द्वारा ऐसी दुकानों / मकानों की बिक्री किए जाने के लिए एक नीति लागू करने का निर्णय लिया है, जहां ऐसी संपत्तियों का स्वामित्व नगर निकायों की बजाय अन्य संस्थाओं/व्यक्तियों या इसके पूर्ववर्ती के पास 20 वर्ष या इससे अधिक की अवधि से है।

यह नीति ‘नगर निकायों द्वारा दुकानों/ मकानों की बिक्री के लिए नीति’ कहलाएगी। यह नीति सरकार द्वारा अधिसूचित किए जाने की तिथि से लागू होगी, जब तक कि अन्यथा इस नीति में या सरकार द्वारा या तो आम तौर पर या किसी वर्ग या संपत्ति / व्यक्तियों की श्रेणी में प्रदान नहीं किया जाता है।

यह नीति लागू करना इसलिए आवश्यक है क्योंकि नगर निकायों में दुकानों/ मकानों के रूप में बड़ी संख्या में ऐसी परिसंपत्तियां विद्यमान हैं जो 20 वर्षों से भी अधिक समय से अन्य संस्थाओं या व्यक्तियों के कब्जे में हैं । नगर निकायों को ऐसी परिसंपत्तियों के प्रबंधन में कठिनाई आ रही है क्योंकि अनेक मामलों में ऐसी परिसंपत्तियों का स्वामित्व/कब्जा अनेक बार परिवर्तित हो चुका है और निकायों के पास संबंधित प्रमाणित दस्तावेजों का भी अभाव है।

यहां तक कि नगर निकाय बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियों से किराया वसूलने में भी असमर्थ हैं। गहन विचार उपरांत यह निर्णय लिया गया कि ऐसी परिसंपत्तियों का स्वामित्व ऐसे लोगों को ही हस्तांतरित कर दिया जाए जिनके पास वर्तमान में ऐसी परिसंपत्तियों का न्यायोचित कब्जा है।

नीति के अनुसार, नगर निकायों की दुकानों / मकानों और अन्य परिसंपत्तियां, जो 20 वर्षों से भी अधिक समय से अन्य व्यक्तियों (नगर निकायों के अलावा) के पास हैं, को उन व्यक्तियों से संबंधित परिसंपत्तियों के रूप में परिवर्तित किया जाएगा या ऐसे व्यक्तियों के कब्जा स्वामित्व में स्थानांतरित किया जाएगा और ऐसे व्यक्तियों को ऐसी संपत्तियां बेची भी जाएंगी।

यह नीति न केवल नगर निकायों की वित्तीय स्थिति को मजबूत करेगी बल्कि छोटे दुकानदारों और अन्य पट्टेदारों को उक्त संपत्तियों के स्वामित्व का अधिकार भी देगी।

नीति के अनुसार, जहां नगर निकाय या उसके पूर्ववर्ती द्वारा भूमि पर बनाई गई पूरी संरचना और भूमि को एक एकल कब्जाधारक को हस्तांतरित किया जाना है (वहां बनाई गई मंजिलों की संख्या के बावजूद) वहां आधार दर प्रभार्य कीमत होगी। इसी प्रकार, जहां निर्मित संरचना दो मंजिला है और ऐसी प्रत्येक मंजिल को अलग-अलग कब्जाधारक को स्थानांतरित किया जाना है, तो भूतल के कब्जाधारक के लिए प्रभार्य कीमत आधार दर का 60 प्रतिशत और प्रथम तल के कब्जाधारक के लिए आधार दर का 40 प्रतिशत होगी।

इसके अलावा, जहां नगर निकाय या उसके पूर्ववर्ती द्वारा निर्मित संरचना तीन मंजिला है और इसे एक से अधिक कब्जेदारों को हस्तांतरित किया जाना है, तो भूतल के कब्जाधारक के लिए प्रभार्य कीमत आधार दर का 50 प्रतिशत, प्रथम तल के कब्जाधारक के लिए 30 प्रतिशत और द्वितीय तल के कब्जाधारक के लिए आधार दर का 20 प्रतिशत होगी।

नगर निकाय के अलावा व्यक्तियों/संस्थाओं या उसके पूर्ववर्ती द्वारा वर्णित भूमि पर निर्मित संरचना और / या भवन के घटक जो इस नीति के संदर्भ में हस्तांतरण के लिए प्रस्तावित है, के लिए प्रभार्य मूल्य की गणना (वर्ग गज की इकाई में दर्शाया गया नगर निकाय के अलावा किसी व्यक्ति / संस्थाओं द्वारा निर्मित कुल कारपेट क्षेत्र) को 1,000 रुपये से गुणा करके की जाएगी और इस नीति के संदर्भ में हस्तांतरित किया गया माना जाएगा।

आवेदक / कब्जाधारक जिसके पक्ष में कन्वेनस डीड के निष्पादन के माध्यम से संपत्ति हस्तांतरित की गई है, नगर पालिका या उसके पूर्ववर्ती या सरकार के सभी लागू करों के अलावा सभी स्थापित करों एवं बकायों और उसके बाद किराया / लाइसेंस शुल्क तथा संपत्ति कर / अग्नि कर / पेशा कर/ व्यापार कर / कॉलिंग एवं रोजगार कर / लाइसेंस फीस / किराया / तहबाजारी / पट्टा राशि का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी होगा।

 

माता पिता खोने वाले बच्चों के लिए योजना- हरियाणा में कोविड-19 महामारी के कारण अपने माता-पिता को खोने वाले बच्चों को सुरक्षित भविष्य देने के लिए मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज ‘मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना’ की घोषणा की है। इस योजना के तहत ऐसे बच्चों के पालन-पोषण और पढ़ाई के लिए आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का उद्देश्य 18 वर्ष से कम उम्र के ऐसे बच्चों, जिन्होंने कोविड के कारण अपने माता या पिता अथवा माता-पिता, दोनों या कानूनी अभिभावकों को खो दिया है, का पुनर्वास और सहायता करना है।

गैर-संस्थागत देखभाल में बच्चों के लिए वित्तीय सहायता- मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार माता-पिता की मृत्यु के बाद जिन बच्चों की देखभाल परिवार के अन्य सदस्य कर रहे हैं, ऐसे बच्चों के पालन पोषण के लिए 18 वर्ष तक 2500 रुपये प्रति बच्चा प्रति मास राज्य सरकार की ओर से परिवार को दिए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, 18 वर्ष तक की आयु होने तक जब तक बच्चा पढ़ाई करेगा तब तक 12,000 रुपये प्रति वर्ष अन्य खर्चों के लिए भी दिए जाएंगे।

संस्थागत देखभाल में बच्चों के लिए वित्तीय सहायता- मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन बच्चों के देखभाल करने के लिए परिवार का कोई सदस्य नहीं है उनकी देखभाल ‘बाल देखभाल संस्थान’ करेंगे। ऐसे बच्चों के लिए बाल देखभाल संस्थान को आर्थिक सहायता के रूप में 1500 रुपए प्रति बच्चा प्रति महीना बच्चे के 18 वर्ष की आयु होने तक राज्य सरकार की ओर से प्रदान किए जाएंगे।

यह राशि आवर्ती जमा के रूप में बैंक खाते में डाल दी जाएगी और 21 वर्ष की आयु होने पर बच्चे को मैच्योरिटी राशि दे दी जाएगी। अन्य पूरा खर्चा बाल देखभाल संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा।

किशोरियों के लिए संस्थागत देखभाल और शिक्षा- मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि जिन लड़कियों ने किशोरावस्था में अपने माता-पिता को खोया है, उन्हें कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में आवासीय शिक्षा मुफ्त दी जाएगी।

विवाह पर लडकियों को सहायता- मुख्यमंत्री ने यह भी घोषणा की कि मुख्यमंत्री विवाह शगुन योजना के तहत 51000 रुपये भी इन बालिकाओं के बैंक खाते में डाल दिए जाएंगे और विवाह के समय उन्हें ब्याज सहित पूरी राशि दी जाएगी।

कक्षा 8-12 में बच्चे के लिए टैबलेट- मनोहर लाल ने घोषणा की कि कक्षा 8वीं से 12वीं के बीच या व्यावसायिक पाठ्यक्रम में किसी भी कक्षा में पढऩे वाले बच्चों को उनकी शिक्षा में सहायता के लिए एक टैबलेट प्रदान किया जाएगा ।