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हरियाणा में धान की की खेती पर नहीं है प्रतिबंध, सरकार ने किसानों के लिए जारी की सिर्फ एडवाईजरी

Yuva Haryana, chandigarh हरियाणा में धान पर प्रतिबंध को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज साफ कर दिया है कि धान की खेती पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, इस बारे में सिर्फ किसानों के लिए एडवाईजरी जारी की गई है। पानी के संकट को देखते हुए किसानों को यह...


हरियाणा में धान की की खेती पर नहीं है प्रतिबंध, सरकार ने किसानों के लिए जारी की सिर्फ एडवाईजरी

Yuva Haryana, chandigarh

हरियाणा में धान पर प्रतिबंध को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आज साफ कर दिया है कि धान की खेती पर प्रतिबंध नहीं लगाया गया है, इस बारे में सिर्फ किसानों के लिए एडवाईजरी जारी की गई है। पानी के संकट को देखते हुए किसानों को यह सलाह दी गई है, कि पानी को बचाया जाए।

हरियाणा में धान की फसल पर प्रतिबंध की चर्चाएं गर्म थी, जिसके बाद सरकार द्वारा इस संबंध में आदेश जारी करने की बात कही जा रही थी, लेकिन आज मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मेरा पानी मेरी विरासत योजना की पूरी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि धान की खेती के लिए किसानों पर कोई प्रतिबंध नहीं है, बल्कि ये एक सलाह है।

मनोहर लाल ने कहा कि इस फैसले का कोई नोटिफिकेशन नहीं जारी किया गया है। यह एक एडवाइजरी टाइप है। किसानों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। यह एक स्वैच्छिक फैसला है। यह किसानों से अपील है कि पानी की समस्‍या को देखते हुए वे धान की खेती से परहेज करें। ‘मेरा पानी मेरी योजना’ जल के संकट को ध्यान में रखते हुए बनाई है। उन्‍होंने कहा, ‘किसान हमारे भाई हैं, सरकार किसान हितेषी है। ऐसी योजना की हर वर्ष चर्चा होती थी। हमने किसानों से अपील की है जहां पानी का भूमि में स्‍तर 40 मीटर नीचे चला गया है, वहां धान बोने से परहेज करें।

मनोहर लाल ने कहा, पहले हमने 50 फसद किसानों को धान की खेती नहीं को करने को कहा था लेकिन बाद में जिनके पास दो एकड़ जमीन है, उनको राहत दी। हमने छोटे किसानों को छूट दी और जहां खेतों में जलभराव रहता है, उनको छूट दी। बाढ़ग्रस्त एरिया में पानी का लेवल ऊंचा उठाने का प्रयास कर रहे हैं। किसानों का एक भी एकड़ खाली नहीं छोड़ने दिया जाएगा।

उन्‍होंने कहा कि किसानों को वैकल्पिक फसल बोने के लिए सहायता दी जाएगी । इसके लिए सब्सिडी भी दी जाएगी। किसानों की फसल का बीमा करवाया जाएगा। उनकी फसल खरीद सुनिश्चित की जाएगी। अगर धान के अलावा कोई फसल नहीं बोई जाती तो उसमें भी किसानों से बैठकर बातचीत करेंगे कि पानी बचाकर कैसे धान की खेती की जा सकती है

उन्‍होंने पूरे मामले के गर्माने के बारे में कहा कि यदि किसी खास क्षेत्र में अगर कुछ लोग राजनीति करने पहुंच जाएंगे तो इसका मतलब यह नहीं कि सारे किसान नाराज हैं। मेरी कई किसानों से बातचीत हुई है। काफी किसानों ने अपनी इच्छा से धान की खेती नहीं करने का फैसला लिया है।