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पहाड़ दरकने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी, 60 होल में डेटोनेटर लगा तोड़े पत्थर, 3 मशीनें खदान में उतारीं, अभी भी मलबे में दबे हैं कई शव
 

हरियाणा के भिवानी में शनिवार सुबह पहाड़ दरकने के बाद रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। रेस्क्यू में बाधा बने 3 बड़े पत्थरों को रविवार दोपहर 3:07 बजे ब्लास्टिंग कर तोड़ दिया। ब्लास्टिंग के लिए पत्थरों में 20 फीट गहरे 60 होल कर विस्फोटक लगाया गया। अब दोबारा से पत्थरों को हटाने का काम शुरू किया जा रहा है।

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ब्लास्ट से पहले भिवानी के तोशाम एरिया के डाडम स्थित घटनास्थल और आसपास का एरिया सील कर दिया गया है। किसी को भी आने-जाने की इजाजत नहीं दी गई है। वहीं, विस्फोट के बाद दोबारा टीम को खान में उतारा गया है। टीमें नीचे उतारने से पहले यह कन्फर्म किया गया कि कोई डेटोनेटर बचा हुआ तो नहीं रह गया है।

इससे पहले 3 पोकलेन मशीनें खान में भेजी गईं हैं, ये मशीन ब्लास्ट से तोड़ गए पत्थरों के टुकड़ों को घटनास्थल से हटाएंगी। इसके बाद मैनपावर से काम लिया जाएगा। दबे वाहनों को काटने के लिए हाईड्रोलिक कटर की मदद ली जाएगी। टीम ने एंबुलेंस, स्ट्रेचर तैयार कर रखा है।

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वहीं, मृतकों की संख्या 5 हो गई। मलबे से शनिवार देर रात रेस्क्यू टीम को एक और शव मिला था। जिस बचाव कर्मियों ने प्रशासन को हैंडओवर कर दिया था। शव किसी मशीन ऑपरेटर का बताया जा रहा है, जो पंजाब का रहने वाला है। एनडीआरएफ के डिप्टी डायरेक्टर बीआर मीणा ने पुष्टि की है।

मीणा ने बताया कि शनिवार देर रात धुंध बढ़ जाने के कारण डाडम में रेस्क्यू ऑपरेशन में दिक्कत आई। सुबह भी यहां पर घनी धुंध छाई रही। सिर्फ 5 फीट तक विजिबिलिटी रही। एक बहुत बड़ा पत्थर रेस्क्यू में बाधा पैदा कर रहा था। अभी बचाव कार्यों में 42 सदस्यीय टीम लगी है।

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फिलहाल ट्रक ड्राइवर भालौठ निवासी धर्मबीर के अभी दबे होने की बात कही जा रही है। उसे निकालने का काम अब दोबारा से शुरू किया गया है। हालांकि और लोगों के भी दबे होने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता। रविवार सुबह तक घटनास्थल से सिर्फ आधा मलबा ही हटाया जा सका है।

मीणा ने बताया कि ऑपरेशन में अभी छह मशीनें लगी हुई हैं। वहीं, देर रात टीम ने स्निफर डॉग और थ्रो वॉल्ट मशीनों से दबे लोगों की सर्चिंग की थी और 4 से ज्यादा प्वाइंट पर लोगों के दबे होने के संकेत दिए थे, लेकिन मशीन से वहां पर किसी के जिंदा होने के सिग्नल नहीं मिले।

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खनन नियमों के अनुसार, खदान में काम करने के लिए उतरने वाले मजदूरों, ड्राइवर, ऑपरेटर के लिए एक हाजिरी रजिस्टर होना चाहिए। कौन कितने बजे काम के लिए अंदर गया है, उसमें रिकॉर्ड दर्ज होता है। डाडम में जहां पर यह हादसा हुआ है, यह प्रतिबंधित एरिया है। खदान की ओर आने वाले एक मात्र रास्ते पर कंपनी ने बैरिकेडिंग कर रखी है।

मीणा के अनुसार मुख्य रास्ते पर 6 बैरिकेड लगाए गए हैं। रास्ते पर बगैर अनुमति के किसी के जाने पर मनाही है। इसके बावजूद यह पता न होना कि कितने लोग अंदर काम कर रहे थे और कौन-कौन अंदर था, अपने आप में खनन काम में चल रही बड़ी लापरवाही को बता रहा है, साथ ही नियमों की अनदेखी की ओर भी इशारा कर रहा है।

आपको बता दें कि शनिवार सुबह 8:30 बजे हादसा हुआ था। पहाडिय़ों में खनन के दौरान पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा दरक गया था। हादसा गोवर्धन माइंस की खदान में हुआ था। इसमें 20 से 25 लोगों और 4 पोकलेन मशीनों, 2 हॉल मशीनें, 2 ट्रैक्टर और 6 ट्रॉले व डंपर दबे होने की बात कही जा रही है।